संगम। जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य है, लेकिन कोयलीबेड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत घोड़ागांव के आश्रित ग्राम मरकाचुआ के स्कूल पारा के करीब 20 परिवार आज भी पानी के लिए भटक रहे हैं। हालत यह है कि ग्रामीणों को कभी स्कूल के बोर से तो कभी करीब एक किलोमीटर दूर दूसरे पारा से पानी लाना पड़ रहा है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बच्चों को हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत गांव में दो पानी की टंकियां लगाई जानी थीं। इनमें से एक टंकी लग चुकी है, जबकि दूसरी टंकी स्कूल पारा में प्रस्तावित थी। यहां हैंडपंप खराब होने के कारण टंकी का काम आगे नहीं बढ़ सका।
फोटो लेकर चले गए, फिर नहीं लौटे
ग्रामीणों ने बताया कि ठेकेदार ने खराब हैंडपंप की जगह नया हैंडपंप लगाने और इसके साथ ही पानी की टंकी लगाने की बात कही थी। इस दौरान ग्रामीणों की फोटो भी ली गई, लेकिन इसके बाद ठेकेदार दोबारा गांव नहीं पहुंचा। लंबे समय बाद भी न तो नया हैंडपंप लगाया गया और न ही प्रस्तावित पानी की टंकी का काम शुरू हो सका।
महिलाओं को उठाना पड़ रहा सबसे ज्यादा बोझ
स्कूल पारा में पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं होने से करीब 20 परिवारों को रोजाना पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। महिलाओं को कभी स्कूल के बोर से तो कभी करीब एक किलोमीटर दूर दूसरे पारा में जाकर पानी भरकर लाना पड़ता है। इससे घरेलू कामकाज के साथ-साथ उनका समय और मेहनत भी बढ़ रही है।
ग्रामीण महिलाओं बारातीन जैन, साक्ष्य ठंडियां, रेशमा उसेंडी, धनोति उसेंडी, दीपमाला ठंडियां और सविता जैन ने बताया कि लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई है। जल जीवन मिशन के तहत टंकी और पानी की व्यवस्था होने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। उन्होंने स्कूल पारा में जल्द हैंडपंप और प्रस्तावित पानी की टंकी लगाने की मांग की है।
इंजीनियर का नहीं मिला पक्ष
इस संबंध में पीएचई विभाग के इंजीनियर कपिल नेताम से जानकारी लेने के लिए कई बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसलिए यह जानकारी नहीं मिल सकी कि प्रस्तावित पानी की टंकी और हैंडपंप का काम अब तक क्यों लंबित है और इसे कब तक पूरा किया जाएगा।

