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जगदलपुर में ‘आदिवासी आवाज प्रशिक्षण’ का समापन, 55 युवाओं ने सीखे मीडिया और डिजिटल कंटेंट निर्माण के गुर

बस्तर। भतरा समाज विकास परिषद भवन में आदिवासी लाइव्स मैटर द्वारा आयोजित नि:शुल्क तीन दिवसीय आवासीय “आदिवासी आवाज प्रशिक्षण” कार्यक्रम का 9 जून से 11 जून 2026 तक सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा के कुल 55 आदिवासी युवाओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी युवाओं को मीडिया, संचार एवं डिजिटल कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करना था, ताकि वे अपने समाज, संस्कृति और समकालीन मुद्दों को आदिवासियत के दृष्टिकोण से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को स्टोरीटेलिंग, वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी, वीडियो एडिटिंग, आर्टिकल राइटिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग और डिजिटल कंटेंट निर्माण जैसे विषयों की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण की शुरुआत आदिवासी लाइव्स मैटर के प्रोजेक्ट मैनेजर नितेश महतो के परिचय सत्र से हुई। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ आदिवासियत, सामुदायिक पहचान और उसके महत्व पर चर्चा की। साथ ही विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की उपयोगिता बताते हुए यह समझाया कि अलग-अलग प्रकार की सामग्री के लिए कौन-सा मंच अधिक प्रभावी होता है।आदिवासी लाइव्स मैटर के कम्युनिकेशन मैनेजर राहुल हेम्ब्रम ने स्क्रिप्ट राइटिंग और प्रभावी कहानी लेखन की तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि एक सशक्त स्क्रिप्ट किसी भी कंटेंट को अधिक प्रभावशाली और दर्शकों से जुड़ने योग्य बनाती है।

प्रशिक्षण के दौरान योगेश नरेटी और अनुभव शोरी ने अपने अनुभव साझा करते हुए विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर संवाद किया। इस चर्चा ने प्रतिभागियों को समाज की कहानियों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करने की नई दृष्टि प्रदान की।वहीं, तुमलेश नेटी ने फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, पोस्टर मेकिंग, डिजिटल डिजाइनिंग और प्रभावी कंटेंट प्रस्तुति की तकनीकी बारीकियों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को सात दिवसीय विशेष चैलेंज दिया गया। इसके तहत उन्हें लगातार सात दिनों तक किसी आदिवासी मुद्दे पर वीडियो तैयार करना होगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को आदिवासी लाइव्स मैटर की ओर से अन्य राज्यों के शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण का अवसर प्रदान किया जाएगा।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के 10 जिलों के अलावा महाराष्ट्र और ओडिशा से भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। आयोजकों के अनुसार यह प्रशिक्षण आदिवासी युवाओं के लिए संवाद, सीखने, नेतृत्व विकास और नेटवर्किंग का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

थमीर कश्यप
थमीर कश्यप
थमीर कश्यप बस्तर, छत्तीसगढ़ के पत्रकार, डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफर और फिल्ममेकर हैं। वे आदिवासी संस्कृति, ग्रामीण जीवन, जंगल और बस्तर के जमीनी मुद्दों पर अपनी विशेष रिपोर्टिंग और विजुअल स्टोरीटेलिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी कहानियाँ बस्तर की परंपरा, संस्कृति और स्थानीय समुदायों की आवाज़ को प्रमुखता से सामने लाती हैं।
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