सूरजपुर। केंद्रीय गृह मंत्री के “वनवासी” शब्द वाले बयान के खिलाफ सूरजपुर में बुधवार को आदिवासी समाज सड़क पर उतर आया। जिला मुख्यालय के अग्रसेन चौक में जुटे सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया, नारेबाजी की और गृह मंत्री का पुतला दहन कर विरोध जताया।
प्रदर्शन के दौरान तेज धूप और फिर अचानक हुई बारिश भी लोगों के कदम नहीं रोक सकी। भीगते हुए प्रदर्शनकारी लगातार नारे लगाते रहे—“हम वनवासी नहीं, आदिवासी हैं।”दरअसल, 24 मई को जनजाति सुरक्षा मंच के एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री ने आदिवासी समुदाय के लिए “वनवासी” शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके बाद से आदिवासी संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है।
सूरजपुर में हुआ यह प्रदर्शन उसी विरोध की कड़ी माना जा रहा है।सभा को संबोधित करते हुए सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष बी.पी.एस. पोया ने कहा कि आदिवासी समाज सिर्फ जंगलों में रहने वाला समुदाय नहीं, बल्कि इस देश की प्राचीन मूलवासी सभ्यता का प्रतिनिधि है। उनकी अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि “वनवासी” शब्द आदिवासी समाज की ऐतिहासिक पहचान को कमजोर करता है।
उन्होंने कहा कि संविधान में आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दी गई है और उनकी पहचान व अधिकारों की रक्षा की गारंटी भी दी गई है। ऐसे में इस तरह की शब्दावली समाज की भावनाओं को आहत करती है।प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की।
साथ ही चेतावनी दी कि भविष्य में भी यदि “वनवासी” शब्द का इस्तेमाल किया गया तो गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक आंदोलन तेज किया जाएगा।प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा गया। प्रदर्शन में जुनास एक्का, सुमन टोप्पो, राजा क्षितिज कुमार सिंह उइके समेत विभिन्न ब्लॉकों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल रहे।


