बस्तर। चारों ओर पहाड़ियों से घिरे लोहा गांव से रात के समय NMDC की टिमटिमाती लाइटें साफ दिखाई देती हैं। लेकिन जिन जमीनों से NMDC लोहा निकाल रहा है, वहां रहने वाले ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांव तक न बिजली पहुंच पाई है, न शुद्ध पेयजल और न ही समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।
ग्राउंड स्टोरी हिंदी की टीम ने करीब आठ किलोमीटर पगडंडी रास्तों से सफर तय कर इस गांव तक पहुंच बनाई। ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही पूरा गांव घने अंधेरे में डूब जाता है। बिजली नहीं होने के कारण सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता है और लोग दहशत में रात गुजारते हैं। वहीं, किसी के बीमार पड़ने पर समय पर इलाज मिल पाना भी मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन ने 8 से 10 साल पहले गांव में सोलर लाइट की व्यवस्था की थी, लेकिन अब वे भी बंद पड़ी हैं। गांव के सभी घरों तक सोलर लाइट नहीं पहुंचाई गई थी। ग्राउंड स्टोरी हिंदी की टीम ने जब गांव का जायजा लिया, तो कई घरों में सोलर लाइट की खराब बैटरियां कबाड़ में पड़ी मिलीं। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हें ठीक करने के लिए आज तक क्रेडा विभाग का कोई कर्मचारी गांव नहीं पहुंचा।
लोहा गांव में कुछ साल पहले तक करीब 60 परिवार रहते थे, लेकिन अब यहां सिर्फ 15 परिवार ही बचे हैं। गांव में साफ पानी का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। यहां के लोग आज भी NMDC की आयरन ओर खदानों से निकलने वाले लाल रंग के पानी को पीने के लिए मजबूर हैं।
लोहा गांव की तस्वीर यह सवाल खड़ा करती है कि देश के कई हिस्सों तक आज भी विकास की रोशनी क्यों नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीण शासन-प्रशासन से सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं, ताकि वे भी मुख्यधारा से जुड़ सकें।
बीते महीने कलेक्टर ने भी पैदल गांव का दौरा किया था और लोहा गांव पहुंचकर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन महीना बीत जाने के बाद भी गांव की स्थिति जस की तस बनी हुई है और प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।


